Human Trafficking की आहट या कुछ और भी ज्यादा डरावना?

अजमल शाह
अजमल शाह

मुंबई में बीते सिर्फ 36 घंटों के भीतर 12 नाबालिग बच्चों के लापता होने की खबर ने पुलिस और आम लोगों—दोनों की नींद उड़ा दी है।
इनमें 8 लड़कियां शामिल हैं और मामले शहर के 7 अलग-अलग पुलिस स्टेशन क्षेत्रों से सामने आए हैं।

संयोग या साजिश? यही सवाल इस वक्त पूरे शहर में गूंज रहा है।

हर केस में Kidnapping FIR, Police on War Footing

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हर घटना में अपहरण (Kidnapping) का मामला दर्ज किया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए Special investigation teams गठित। CCTV फुटेज खंगाले जा रहे। आस-पास के जिलों को अलर्ट। Railway stations, bus depots और transit points पर निगरानी।

मतलब साफ है, यह कोई routine missing case नहीं माना जा रहा।

Human Trafficking Network का शक क्यों?

पुलिस को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि बच्चे अलग-अलग इलाकों से बेहद कम समय में लगभग एक जैसे पैटर्न में गायब हुए। यही वजह है कि जांच की दिशा organised human trafficking network की ओर मुड़ चुकी है।

 Pattern दिख रहा है और उसे ignore नहीं किया जा सकता।”

Families Waiting, City Watching

लापता बच्चों के परिवारों के लिए यह वक्त हर मिनट भारी है। फोन की हर घंटी, हर पुलिस कॉल—उम्मीद और डर के बीच झूल रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल पूछ रहे हैं “Mumbai safe hai… ya sirf lagti hai?”

Mumbai वो शहर है जो कभी नहीं सोता सब कुछ देखता है लेकिन कई बार… कुछ बचा नहीं पाता। 12 बच्चे, 36 घंटे ये सिर्फ आंकड़े नहीं, alarm bells हैं।

पुलिस का कहना है कि जांच ongoing है। digital + ground intelligence साथ चल रही है। जल्द ठोस सुराग मिलने की उम्मीद है। लेकिन तब तक, शहर high alert mode में ही रहेगा।

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